रविवार, मई 26

मनुष्य v/s धरती। विनाशलीला

जो मिला मनुष्य को काफी था। मगर जब मनुष्य संतुष्ट नहीं हुआ, तो उसने अपनी संतुष्टि के लिए, नदी नाले बांध दिए, कहीं पेड़ काटेे कहीं सड़क बना दी कहीं घर बना दिए कहीं खेत और खलिहान बना दिए। और कही सरहदें बना दी। रोजमर्रा की जिंदगी में मनुष्य हर तरह से, हर दिन,इस प्रकृति को इस धरती को किसी ना किसी वजह से छिन्न भिन्न कर रहा है,अपनी इच्छाओं की पूर्ति के लिए, तो अपने पेट की भूख को शांत करने के लिए। आज मनुष्य इस धरती के अलावा अन्य ग्रहों पर भी अपनी दृष्टि गडाए हुये हैं। बड़ा ही अजीब  सा हो गया है मनुष्य,आपस में लड़ता है एक दूसरे को मारता है और इस प्रकृति को हानि पहुंचाता है। हम किसी दूसरे मनुष्य को मार रहे हैं,यह सोच कर बड़े-बड़े बम परमाणु बम हमले की बातें करता है, परमाणु बम क्या है यह सब आप अच्छी तरह से जानते हैं।हम सब जान कर भी अंजान है कि, जितना अधिकार इस धरती पर मनुष्य का है। उतना ही अधिकार अन्य जीव जंतु पेड़ पौधों का भी है। परंतु यह सब सोचने के लिए मनुष्य के पास समय ही नहीं है,इस बात से अनभिज्ञ होकर मनुष्य ना ना प्रकार के कर्म करता है।अन्य जीवो को तुच्छ जानकर, उन्हें खत्म करने में लगा हुआ है। कई तरह के विषैली चीजें इस प्रकृति में फैला रखी हैं। जिससे कई पशु पक्षी विलुप्त हो चुके हैं,और कई विलुप्त होने की कगार पर है।गर्मियों के मौसम में पक्षियों को पानी देना, उन्हें खाना देना इस तरह की दिखावटी बातें हर कोई करता हुआ दिखाई देगा, लेकिन यह कितना सच है, हम और आप अच्छी तरह से जानते हैं, की कौन कितना पशु पक्षियों की देख भाल करता है और कौन किसकी सहायता करता है। और ऐसी स्थिति पैदा हुई कैसे यह भी सब जानते हैं। रोबोट 2.0 ऐसी एक फिल्म है जिसमे  पक्षियों के संरक्षण  की बात कही गई ,परंतु क्या हम इस फिल्म से कुछ सीख पाये या नहीं? या फिर अपनी विनाश लीला आगे जारी रखेगे। हम अपनी जरूरतो के अलावा किसी को कुछ नही समझते है, चाहे कोई मर जाए या धरती से चला जाए। इंसानों को किसी कि क्या परवाह है। जब मनुष्य, मनुष्य का भला नहीं चाहता है,तो पृथ्वी का क्या भला सोचेगा। इस विनाशलीला मे मनुष्य से कब तक बची रह सकती है ये धरती।और मनुष्य का क्या होगा? मनुष्य क्या करेगा जब कहीं आग होगी और  कहीं होगा तेजाब, हाँ क्योंकि  आसमान से पानी की जगह तब तेजाब कि बरसात होगी। आखिर कौन जीतेगा मनुष्य या धरती?

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सोमवार, मई 20

जोर नाची रे

जोर नाची छोरी जोर नाची रे।
ठुमका लगाए गोरी जोर नाची रे।
1
कभी पहेने जींसा
कभी पहेने पेंट
आज साड़ी और लहंगा उठाए नाची रे।
2
खींचे है बीड़ी
और खीचे सिगरेट
आज हुक्के पे हुक्का लगाए नाची रे।
3
ओठ लाली लगाए
और बिन्दया लगाए
आज चश्मा लगाए बडी जोर नाची रे।

जोर नाची छोरी जोर नाची रे

ठूमका लगाए गोरी जोर नाची रे


दिल्ली मे नाची रे मुम्बई मे नाची

दिल्ली मे नाची

दिल्ली मे नाची रे मुम्बई मे नाची

गोवा मे जाय बड़ी जोर नाची रे

ठूमका लगाए गोरी जोर नाची रे

जोर नाची छोरी जोर नाची रे

ठूमका लगाए गोरी जोर नाची रे



गलीयो मे नाची रे सङको मे नाची

गलीयो मे नाची

गलीयो मे नाची रे सङको मे नाची

घर घर मे जाय बड़ी जोर नाची रे

ठूमका लगाए गोरी जोर नाची रे

जोर नाची छोरी जोर नाची रे

ठूमका लगाए गोरी जोर नाची रे



ढोलक पे नाची रे तबले पे नाची

ढोलक पे नाची

ढोलक पे नाची रे तबले पे नाची

डी जे पे थीरक थीरक जोर नाची रे।

ठूमका लगाए गोरी जोर नाची रे

जोर नाची छोरी जोर नाची रे

ठूमका लगाए गोरी जोर नाची रे


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मंगलवार, अप्रैल 9

रेल गाड़ी - भाग 1


यह कहानी पूर्ण रूप से काल्पनिक है इसका किसी भी वेक्ति , वस्तु , या स्थान से कोई सम्भन्ध नहीं है।


बाङा हि शोरगुल हो रहा था, लोह पथ गामिनी तेज पो................. कि आवाज करते हुए एक प्लेटफार्म पर आकर रुक गयी।
कुछ हि पलों के बाद मेरे सामने वाली सीट पर एक अति सुन्दर कन्या बैठी।
उस पर मेरा ध्यान क्या गया, मानो मेरा तन मन और धङकन सब कुछ उसी का हो गया।
उसे एकटक देखता हुआ सोचने पर मजबूर हो गया कि वो सारा शोरगुल अचानक एक दम से कहा चला गया। वहां पर उसके और मेरे सिवा तेज ठन्डी हवा बह रही थी। चन्द्र प्रकाश चारों दिशाओं में फैला हुआ था। वो एक सरोवर के किनारे बैठी इठलाती हुई तैरती हुई बतखो पर कन्नड़ मार रही है। मैंने  तेज आवाज़ मे कहा 'ए लङकी' और तभी मैंने देखा कि मेरी आवाज़ सभी मौजूद यात्रीयो ने सुनी। बात को आगे बढ़ाते हुए कहा कि आप को कहा जाना है? उसने कहा मुझे दिल्ली जाना है। तभी मैंने कहा ये रेल दिल्ली नहीं जाती,तो वह इधर-उधर चर्चा करके मुझे धन्यवाद देकर प्लेटफार्म पर उतर गयी। और फिर वही शोरगुल के साथ लोह पथ गामिनी ने पो................. 
कि तेज आवाज़ लगाई और अपने लक्ष्य की ओर बढने लगी











शनिवार, अप्रैल 6

तू आजा मेरे नाल सोनिए

गजब की तेरी आंखें,
गजब की तेरी बातें,
गजब की तेरी चाल सोनिए,
तू आजा मेरे नाल सोनिए,
तू आजा मेरे नाल सोनिए,
तू आजा मेरे नाल सोनिए,
+
गजब का तेरा कजरा,
गजब का तेरा गजरा,
गजब का तेरा हाल सोनिए,
तू आजा मेरे नाल सोनिए,
तू आजा मेरे नाल सोनिए,
तू आजा मेरे नाल सोनिए,
1
तुझे कजरा दिलाऊ,
तुझे गजरा दिलाऊ,
तुझे गले से लगाऊ,
तुझे डोली में ले जाऊं,
तू लगदी कमाल सोनिए,
तू आजा मेरे नाल सोनिए,
गजब की तेरी आंखें,
गजब की तेरी बातें,
गजब की तेरी चाल सोनिए,
तू आजा मेरे नाल सोनिए।
तू आजा मेरे नाल सोनिए।
तू आजा मेरे नाल सोनिए।
2
तेरी मांग सजाऊ,
तुझे दुल्हन बनाऊ,
तेरा हाथ पकड़ के,
फेरे सात मैं लगाऊं,
हो जाऊंगा मालामाल सोनिए,
तू आजा मेरे नाल सोनिए,
गजब का तेरा कजरा,
गजब का तेरा गजरा,
गजब का तेरा हाल सोनिए,
तू आजा मेरे नाल सोनिए।
तू आजा मेरे नाल सोनिए।
तू आजा मेरे नाल सोनिए।

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रविवार, मार्च 31

ठुमके पे दिलदार

तेरे ठुमके पे दिलदार,
मरते मेरे सारे यार।
मेरे ठुमके पे दिलदार,
मरते तेरे सारे यार।
1
घूंघट हटा के थोङा सरमा के,
तीर चलाए वो नजरे झुका के।
मै तो घायल रे दिलदार,
मरते मेरे सारे यार।
2
मै तो करती हूँ इजहार,
तुझसे किया है मैंने प्यार।
मेरे सुनले ओ दिलदार,
मरते तेरे सारे यार।
3
तेरा मुखड़ा चांद सा यार,
मुझको कर लेने दे दीदार।
तेरे झुमके पे दिलदार,
मरते मेरे सारे यार।

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सोमवार, मार्च 18

बिजनेस का जादू

एक बहुत बड़ी फेमस कंपनी में एक वर्कर सुपरवाइजर की पोस्ट पर आया।उसी समय, उसी कंपनी के सामने, एक आदमी ने एक छोटी सी दुकान लगाई । वह आदमी चाय, समोसा, पकोड़ा, नाश्ता और पोहा  बेचा करता था। समय बीतता गया, सुपरवाइजर से सीनियर सुपरवाइजर हो गया, सीनियर सुपरवाइजर से इंजीनियर हो गया, इंजीनियर से साहब बन गया,एक दिन उसे अपने साहब होने का घमंड हो गया  और वह उसी दुकान पर गया,जहां से उसने शुरुआत की थी।वह दुकान मालिक से मिला और बोला कि मैं 20 साल से आपको देख रहा हूं, आप इसी दुकान में काम करते हैं समोसा बनाते हैं जलेबी बनाते हैं और मैं 20 साल से इस कंपनी में काम करता हूं और आज साहब बन गया हूं मेरी पेमेंट आज डेढ़ लाख रुपए हो गई है।तब दुकान मालिक ने उस साहब से कहा मैं 20 साल से देख रहा हूं उस वक्त आपकी पेमेंट दस हजार थी,अब आप साहब बन गए हो आपकी पेमेंट डेढ़ लाख रुपए हो गई है, लेकिन मैं मेरी दुकान पर इन 20 सालों में रोज ₹5000 कमाता हूं और अपने परिवार के साथ रहता हूं। और जब आप काम छोड़ कर चले जायेंगे तो आपका लङका आपका काम नहीं कर सकता, पर मेरी दुकान रोज चलेगी और मेरे लङके को नौकरी खोजने की जरूरत नहीं होगी ।
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शुक्रवार, मार्च 15

तन्हा कटे ना सफ़र

ज़िंदगी चलती रही इस कदर।
जिंदगी चलती रही इस कदर।
तन्हा कटे ना सफ़र,
जिंदगी चलती रही इस कदर।
तन्हा कटे न सफ़र।
1
ना तुझको पाया ना तुझको भुला।
ना तुझको पाया ना तुझको भुला।
याद करता रहा हर पहर,ह.......
जिंदगी चलती रही इस कदर।
तन्हा कटे न सफ़र।
2
कभी इस गली में कभी उस गली में।
कभी इस गली में कभी उस गली में।
तुझको ढूंढा सनम दर बदर,ह......
जिंदगी चलती रही इस कदर।
तन्हा कटे न सफ़र।
3
तुम बिन हूं अब मैं तो अकेला।
सावन में लग गया पतझड़ का मेला।
तुम बिन हूं अब मैं तो अकेला।
सावन में लग गया पतझड़ का मेला।
क्यू मुझ पे टुटा कहर,ह.............
जिंदगी चलती रही इस कदर,
तन्हा कटे न सफ़र।

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