शीर्षक: जोश (मदहोश रातें)
शैली: स्लो आर-एंड-बी / सेंशुअल पॉप
(मुख्य मुखड़ा / कोरस)
ना तुम होश में हो, ना मैं होश में हूँ,
बढ़ रही हैं धड़कनें, मैं जोश में हूँ।
(अंतरा 1)
कमरे में मद्धम सी जलती शमा है,
तेरी इन आँखों में डूबा जहाँ है।
कहती है दुनिया तो कहती रहेगी,
जब से तू आई है मदहोश में है।
सब भूल कर तेरे आगोश में हूँ...
(सीधे मुखड़ा...)
ना तुम होश में हो, ना मैं होश में हूँ,
बढ़ रही हैं धड़कनें, मैं जोश में हूँ।
(अंतरा 2)
ज़ुल्फें ये चेहरे पे बिखर जा रही हैं,
हद से भी ज़्यादा तू, गुज़र जा रही है।
साँसों की गरमी जो बढ़ने लगी है,
चाहत की बातें भी चढ़ने लगी हैं।
मैं खोया-खोया तेरे आगोश में हूँ...
(सीधे मुखड़ा...)
ना तुम होश में हो, ना मैं होश में हूँ,
बढ़ रही हैं धड़कनें, मैं जोश में हूँ।
(अंतरा 3 - तुम्हारी शानदार लाइनें)
रात की चादर में छुपा हर नज़ारा,
बाँहों में लिपटा है तू ही है किनारा।
उँगली ने तेरी जो बदन को है चूमा,
मन मस्त हो गया तेरी बातों में झूमा।
तेरी अंखियों में डूबा मैं आगोश में हूँ...
(सीधे मुखड़ा...)
ना तुम होश में हो, ना मैं होश में हूँ,
बढ़ रही हैं धड़कनें, मैं जोश में हूँ।
(आउट्रो / समाप्ति)
धीमी सी साँसें...
बढ़ती ये रातें...
कोई होश कहाँ है...
हाँ, मैं जोश में हूँ...
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